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कैश सब्सिडी योजना

वित्त मंत्री पी चिदंबरम के मुताबिक पहली जनवरी 2013 से 'कैश सब्सिडी योजना' लागू की जाएगी यानी विभिन्न मंत्रालयों द्वारा चलाई जाने वाली कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित कर दिया जायेगा. कैश सब्सिडी योजना को ‘गेम चेंजर’ क़रार देते हुए कहा कि इससे सरकारी सहायता के दुरुपयोग और गलत हाथों में पड़ने का डर नहीं होगा और मदद आसानी से सीधे लाभार्थी तक पहुंचेगी. यूपीए-2 की सबसे बड़ी कल्याणकरी योजना और सुधार कार्यक्रमों में से एक मानी जा रही कैश सब्सिडी योजना को आलोचक कांग्रेस के लिए 'वोट का एटीएम' मान रहे हैं लेकिन यूपीए-2 की ये स्कीम आखिर कैसे काम करेगी?

'डायरेक्ट कैश ट्रांसफर स्कीम' के लिए फिलहाल 42 सरकारी योजनाओं की पहचान की गई है. जिनमें से 29 योजनाओं को पहली जनवरी से देश के 51 जिलों में लागू किया जाएगा. कैश ट्रांसफर के तहत पहली अप्रैल, 2014 से देश भर के करीब 10 करोड़ गरीब परिवारों को 32 हज़ार रुपये सालाना का भुगतान होगा. इस मद में सरकार सालाना तीन लाख बीस हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी. केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम के मुताबिक 51 जिलों का चयन किसी भेदभाव पर नहीं हुआ है, बल्कि जिलों में बैंक शाखाओं की संख्या और राज्य सरकार की अनुशंसा के आधार पर इन जिलों को चुना गया है. जल्द ही यह पूरे देश में लागू होगी. लाभ लेने वाले लोगों का बैंक खाता आधार कॉर्ड के जरिए खोला जाएगा. वित्त मंत्री के मुताबिक आधार कॉर्ड के इस्तेमाल से कोई शख्स एक ही योजना का लाभ दो बार नहीं ले पाएगा. इस योजना को राजस्थान में अनुदानित केरोसीन तेल के भुगतान और कर्नाटक में रसोई गैस की अनुदानित भुगतान की योजनाओं में पहले ही लागू किया जा चुका है.

मौजूदा व्यवस्था में बाकी पैसा बिचौलियों की भेंट चढ़ जाती है. इसके अलावा विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक देरी से पहुंचता रहा है. पी चिदंबरम और जयराम रमेश ने उम्मीद जताई है कि इस योजना के लागू होने से दोनों समस्याओं का हल मिल जाएगा. फिलहाल इस स्कीम को मानव संसाधन विकास मंत्रालय, सामाजिक न्याय, अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय, महिला और बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं में इस स्कीम को लागू किया जाएगा.

माना जा रहा है कि योजना की सबसे बड़ी खामी ये है कि देश की 120 करोड़ से ज़्यादा की आबादी में महज 21 करोड़ लोगों का आधार कार्ड बना हुआ है. ऐसे में यह योजना हर किसी तक कैसे पहुंचेगी. यह सवाल खड़ा होता है. आज से करीब 25 साल पहले देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि सरकार आम लोगों के पास जो सौ रुपया भेजते हैं उनमें से महज 15 रुपये ही उनके पास पहुंचता है. कैश सब्सिडी योजना के अमल में सरकार को 25 साल लगे लेकिन चुनावों से ठीक पहले जारी की गई इस योजना ये सबसे ज़रूरतमंद व्यक्ति को ज़मीनी स्तर पर कितना लाभ पहुंचेगा ये देखना बाकि है.

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